विटामिन की कमी से होने वाले रोग (Deficiency of Vitamin)

विटामिन की कमी से होने वाले रोग

विटामिन भोजन के वे अवयव हैं, जिनकी सभी जीवों को थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। ये कार्बनिक यौगिक होते हैं। उस यौगिक को विटामिन कहा जाता है जो शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में स्वयं उत्पन्न नहीं किया जा सकता बल्कि खाने के रूप में लेना आवश्यक हो। विटामिन ए, बी, सी, डी, ई, बी-कॉम्प्लेक्स आदि तत्वों की आवश्यकता होती है। आइये जानते हैं शरीर में कौन से विटामिन की कमी से कौन सा रोग हो सकता है और इन्हें याद करने की युक्ति –

युक्ति :
राज ने बेड पे दूसरे इनाम में सरिन को रथ दिया
नोट : राज ने बेड/चारपाई पे(पर) चढ़ कर दूसरा इनाम जो की रथ(chariot) है सरिन(मुस्लिम लड़की का नाम) नाम की लड़की को दिया है। वह बेड/चारपाई पर इसलिए चढ़ा क्यों की गाव में स्टेज की व्यवस्था नही थी।

स्पष्टीकरण :
क्रमविटामिनयुक्तिरोग
1Aराजरतौंधी/जीरोफ्थेल्मिया
2B1बेबेरी बेरी
3B2डर्मेटोसिस
4B5पेपेलैग्रा
5B6दूसरे इनामदूसरे मतलब दो, और इनाम मतलब एनीमिया-एनीमिया दो बार लिखना है
6B12दूसरे इनामदूसरे मतलब दो, और इनाम मतलब एनीमिया-एनीमिया दो बार लिखना है
7Cस्कर्वी
8Dरिरिकेट्स
9Eनपुंसकता
10Kरथ दियारक्त का थक्का देर से बनना

 

महत्वपूर्ण-

 

विटमिन A-

यह दो फार्म में पाए जाते हैं, रेटिनॉल और कैरोटीन। ए आंखों के लिए बहुत जरूरी होता है। यह विटामिन शरीर में अनेक अंगों जैसे त्वचा,बाल, नाखून, ग्रंथि, दांत, मसूड़ा और हड्डी को सामान्य रूप में बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से ज्यादातर आंखों की बीमारियां होती हैं, जैसे रतौंधी, आंख के सफेद हिस्से में धब्बे। यह रक्त में कैल्शियम का स्तर बनाए रखने में भी मदद करती है और हड्डियों को मजबूत करती है।

 

विटमिन B-

यह हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन, डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत में सहायता करता है। इसके कई काम्पलेक्स होते हैं, बी1, बी2, बी3, बी5, बी6, बी7 और बी12। यह बुद्धि, रीढ़ की हड्डी और नसों के कुछ तत्वों को बनाने में मदद करता है। लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण भी इसी से होता है। इसकी कमी से बेरी बेरी, त्वचा की बीमारियां, एनीमिया, मंदबुद्धि जैसी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। इसका आनुवंशिक कारण भी हो सकता है। आंतों एवं वजन घटाने की सर्जरी कराना भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। शाकाहारी लोगों में इसकी कमी आम बात हो जाती है क्योंकि यह विटामिन ज्यादातर जानवरों में पाया जाता है।

 

विटमिन C-

यह शरीर की मूलभूत रासायनिक क्रियाओं में यौगिकों का निर्माण और उन्हें सहयोग करता है। तंत्रिकाओं तक संदेश पहुंचाना या कोशिकाओं तक ऊर्जा प्रवाहित करना आदि। विटामिन सी मानव शरीर के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक है। यह एस्कॉर्बिक अम्ल होता है जो कि हर तरह के सिट्रस फल में जैसे, नींबू, संतरा, अमरूद, मौसमी आदि में पाया जाता है। विटामिन सी की कमी से स्कर्वी नामक रोग हो सकता है, जिसमें शरीर में थकान, मासंपेशियों की कमजोरी, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, मसूढ़ों से खून आना और टांगों में चकत्ते पड़ने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं। विटामिन सी की कमी से शरीर छोटी छोटी बीमारियों से लड़ने की ताकत भी खो देता है, जिसका नतीजा बीमारियों के रूप में सामने आता है।

 

विटमिन D-

इसका सबसे अच्छा स्त्रोत सूर्य की किरणें हैं। जब हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आती है तो ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन डी का निर्माण करती हैं। अगर सप्ताह में दो बार दस से पंद्रह मिनट तक शरीर की खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन डी की पूर्ति हो जाती है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, हाथ और पैर की हड्डियां टेढ़ी भी हो जाती हैं। मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होता जाता है, जो लोग मोटापे जैसी बीमारी से ग्रस्त है उन्हें विटामिन डी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ मोटापे को भी कम करना चाहिए।

 

विटमिन E-

यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाए रखने, शरीर को एलर्जी से बचाए रखने की, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में प्रमुख भूमिका निभाता है। विटामिन ई वसा में घुलनशील विटामिन है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है। इसके आठ रूप होते हैं। इसकी कमी से जनन शक्ति में कमी आ जाती है।

 

विटमिन K-

इसकी वसा में विलेय विटामिन हैं जो मानव द्वारा कुछ प्रकार के प्रोटीनों का संश्लेषण करने के लिये जरूरी होता है। विटामिन K की कमी से “रक्त का थक्का नहीं जमता हैं”।

 

सभी विटमिन के रासायनिक नामो को याद करने की युक्ति जाने

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